Uncategorized

हिंदू मानव सभ्यता की दौड़ में कई सौ साल पीछे

हिंदू मानव सभ्यता की दौड़ में कई सौ साल पीछे होने के कारण आज भी बर्बरता से उबर नहीं पाए हैं, यह बात दावे के लिखता रहा हूँ.
मेरा दावा एकदम सही है, इसका प्रमाण आगरा की कल की एक घटना है, जहाँ हिंदुओं ने एक दलित महिला की लाश को चिता से उतारने के लिए बाध्य कर दिया. उस शर्मनाक घटना की रिपोर्ट अभी ndtv पर रवीश के प्रोग्राम में देख रहा हूँ.
बहरहाल यह कोई अपवाद घटना नहीं है. हिंदू रोजाना इससे मिलती जुलती हजारों घटनाएं अंजाम देते रहते, एससी /एसटी एट्रोसिटि जैसे कठोर एक्ट के बावजूद. ऐसे जंगली समाज को क्या सुधारा जा सकता है? नहीं! क्योंकि इसे सुधारने के लिए बाबा साहेब डॉ अम्बेडकर के अनुसार हिंदू धर्म शास्त्रों को डाइनामायट से उड़ाना पड़ेगा, जोकि असंभव है. तब सख्त के भक्त इस बर्बर समाज को सुधारने का एक ही उपाय है, वह यह कि उत्पीड़न का शिकार होने वाली जातियों को सख्त और उत्पीड़क हिंदुओं को लाचार व बेबस बनाने का उपक्रम चलाया जाय. इसके लिए ऐसा करना होगा, जिससे शक्ति के स्रोतों पर हिंदुओं का वर्चस्व टूटे और वंचित जातियाँ सशक्त बनें. इसका एक ही उपाय है : डाइवर्सिटी! यह कैसे लागू होगी, इस पर वंचित समुदायों के बुद्धिजीवी विचार करें !

  • एच एल दुसाध

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *