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हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल!

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अजीब सवाल -1

सामयिक मुद्दों पर लेखन करने वाले भारत के 5 ग्रेटेस्ट पत्रकार कौन ? इनमें क्या आपका मित्र दुसाध भी स्थान पा सकता है ?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अजीब सवाल -2

जितने विषयों पर दुसाध अधिकार पूर्वक कलम चला सकता है, उसके आधे विषयों पर भी कलम चलाने वाला कोई पत्रकार आजतक कम से कम भारत की हिंदी पत्रकारिता में नहीं देखा गया, अगर देखा गया तो प्लीज़ उनका नाम बताकर मेरा ज्ञान वर्द्धन करें.

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल- 3

भारत के पत्रकारिता इतिहास में दुसाध के अतिरिक्त और कौन पत्रकार हुआ, जिसने जिस भी सामयिक मुद्दे पर कलम चलाया, उसे कोई भी surpass नहीं कर सकता ?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल- 4

भारत के इतिहास में सामयिक मुद्दों पर टिप्पणी करने वाला कौन ऐसा पत्रकार हुआ, जिसने महज 20 सालों में 80 किताबें तैयार की ? मैं पूरी तरह को कॉन्फिडेंट हूं कि और कोई नहीं होगा, ऐसे में यह बताएं भारत की हिस्ट्री में दुसाध के बाद सर्वाधिक किताबें देने वाला पत्रकार कौन ?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल- 5

वैसे तो दुसाध नेशनल चैनलों से प्रायः पूरी तरह बहिष्कृत है, फिर भी छोटे – बड़े चैनलों पर शायद 35- 40 बार तो टीवी डिबेट में आया ही है। ऐसे में मुमकिन है टीवी पर मेरा परफार्मेंस आपकी मेमोरी में होगा। अगर ऐसा है तो बताएं टीवी पर दुसाध जैसा स्टाइलिश और प्रभावी अंदाज में अपनी बात रखने वाला इस देश में 5 भी पत्रकार हैं ?

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल- 6

दुसाध हर साल सिर्फ और सिर्फ आर्थिक – राजनीतिक मुद्दे पर डायवर्सिटी डे के अवसर पर औसतन 1000 पेज की डायवर्सिटी इयर बुक अपने संपादन में निकलता है। यह सिलसिला 2006 से अबाध रूप से चल रहा है। इस वर्षिकी की मार्केटिंग नहीं होती, यह सिर्फ डायवर्सिटी मिशन से जुड़े सौ- पचास लोगों के मध्य वितरित होती है। अब जिन लोगों ने डायवर्सिटी इयर बुक देखा/ पढ़ा है, उनसे मेरा सवाल है कि इस देश में कितने लोगों ने डायवर्सिटी इयर बुक जैसी वर्षिकी निकाला है और निकाल रहे हैं ?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल – 7

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में गुलाम भारत में तिलक ऐसे पहले पत्रकार थे, जिन्होंने स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है का मुद्दा खड़ा किया। स्वाधीन भारत में चंद्रभान प्रसाद ने अमेरिकी अश्वेतों की भाँति दलितों के लिए डायवर्सिटी का मुद्दा खड़ा किया।बाद में चंद्रभान जी की आईडिया को आगे बढ़ाते हुए शक्ति के स्रोतों में डायवर्सिटी का मुद्दा खड़ा किया। पत्रकारिता के इतिहास मे और कई पत्रकारों ने अपने – अपने हिसाब से मुद्दे खड़ा किये। प्लीज बड़े बदलाव लाने वाले मुद्दे किन- किन पत्रकारों ने खड़े किये, इनमें दुसाध को कहाँ रखेंगे ?

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर कुछ अजीब सवाल- 8

भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में दुसाध के बाद ऐसे किसी का नाम बताएं जिसे पत्रकारिता में एक खास अध्याय जोड़ने के बावजूद पत्रकारिता के नाम पर बंटने वाले हजारों, लाखों वाले पुरस्कारों में 5 हजार राशि तक पुरस्कार नही मिला: जुनून की हद तक सामयिक मुद्दों पर भूरि 2 लेखन करने के बावजूद आज की तारीख में लेखन से सौ रुपये की मासिक आय नहीं ?

एच एल दुसाध, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली

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