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मोदी: चैंपियन मिथ्यावादी !

आज के 28 जून के दैनिक जागरण में सबका साथ- सबका विकास से जुड़ी मोदी की एक विस्तृत रिपोर्ट छपी है जिसमें केरल के पथनमथिट्टा मे जोसेफ मारथोमा मेट्रोपॉलिटन के 90 वें जयंती पर उनके लंबे स्पीच का सार बताते हुये लिखा गया है-: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार धर्म , लिंग, जाति, नस्ल या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। हम 130 करोड़ भारतीयों को सशक्त बनाने की इच्छा से निर्देशित होते हैं और हमारा मार्गदर्शन भारत का संविधान करता है।‘मित्रों, प्रधानमंत्री का उपरोक्त बयान झूठ की पराकाष्ठा है, ऐसा विगत छः सालों से उनके सरकार के चाल- चलन पर पैनी नजर रखने वाला एक साधारण व्यक्ति भी बता देगा। क्योंकि मोदी जी ने बतौर प्रधानमंत्री विगत छः वर्षों में जिस तरह राजसत्ता का इस्तेमाल सिर्फ हिन्दू ईश्वर के उत्तमांग से जन्मे दुनिया के सबसे बड़े विशेषाधिकारयुक्त जन्मजात सुविधाभोगी वर्ग के हित में किया है, 21 वीं सदी में उसकी मिसाल पूरी दुनिया में ढूँढे नहीं मिलेगी । सत्ता का ऐसा इस्तेमाल सिर्फ राजतंत्रीय व्यवस्था में होता रहा। डेमोक्रेटिक व्यवस्था में अंततः वीसवीं के उत्तरार्द्ध से इसकी विलुप्ति का जो सिलसिला शुरू हुआ वह 21 वीं सदी में आज की तारीख में एक्सट्रीम पर पहुँच गया है। ऐसे दौर में पीएम मोदी ने जिस तरह सवर्णपरस्ती के हाथों विवश होकर शक्ति के समस्त स्रोत भारत के दैविक – अधिकारी वर्ग के हाथों मे पूरी तरह शिफ्ट कराने का निंदनीय कार्य अंजाम दिया है, उसके आधार पर स्वाधीनोत्तर भारत के सबसे बड़े विविधता-विरोधी शासक के रूप में उनकी छवि कब की स्थापित हो चुकि है। आज उनकी सवर्ण-परस्त नीतियों के चलते सवर्णों का आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक इत्यादि शक्ति के समस्त स्रोतों पर औसतन 80-90 प्रतिशत कब्जा हो चुका है। पूरे विश्व में आज की तारीख में दुनिया के किसी भी देश मे जन्मजात सुविधाभोगी व आरामखोर वर्ग का sources of power’s पर ऐसा कब्जा नहीं है । आज उनकी नीतियों से दलित, आदिवासी,पिछड़ों और इनसे धर्मांतरित तबके जिस स्टेज में पहुंच गये हैं, उस स्टेज में सारी दुनिया में ही मुक्ति- संग्राम संगठित हुये।आज मोदी-राज से उपकृत लोगों की संख्या बमुश्किल 20 करोड़ हो सकती है। ऐसी स्थित में यह दावा करना कि हम 130 करोड़ भारतीयों को सशक्त बनाने की इच्छा से निर्देशित होते है, मोदी को चैंपियन मिथ्यावादी साबित करता है। जिन्हें दुसाध द्वारा उनको चैंपियन मिथ्यावादी कहे जाने पर आपत्ति है, वे जरा उनकी इस बात पर भी गौर लें – हमारा मार्गदर्शन भारत का संविधान करता है ! क्या मोदी द्वारा संविधान के विषय में ऐसा कहना झूठ के एवरेस्ट को अतिक्र्म करने जैसा नहीं है ! सबको पता है कि हिन्दुत्ववादी मोदी का सारा ज्ञान-ध्यान हिन्दू-राष्ट्र है , जिसमें शक्ति के सारे स्रोत आरामखोर वर्ग के हाथों मे सौंपे जाना है, जिसका निर्देश तमाम हिन्दू धर्म –शास्त्र देते हैं। चूंकि संविधान के प्रभावी रहते सारा कुछ आरामखोर वर्ग के हाथ में नहीं सौंपा जा सकता , इसलिए मोदी संविधान को निष्क्रिय करने के लिए सारा कुछ निजी क्षेत्र अर्थात सवर्णों के वित्तवान लोगों के हाथों मे दिये जा रहे हैं। ऐसे में संविधान को मार्गदर्शक करार देना भी महाझूठ है। कुल मिलाकर उन्होंने केरल के पथनमथिट्टा मे जोसेफ मारथोमा मेट्रोपॉलिटन के 90 वें जयंती पर जो उद्गार व्यक्त किया है, उसके आधार पर उन्हें चैपियन मिथ्यावादी कहना क्या कोई अतिशयोक्ति होगी !

  • एच एल दुसाध, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली                   

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