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जरूरी है कि हम टेक्नोलोजी और वित्त के मोर्चे पर चीन का मुक़ाबला करने की बेहतर तैयारी करें !

मित्रों, इस बुनियादी बात को अगर ध्यान में रखें तो बहुत सी परेशानियों से निजात पा जायेंगे! जिस बुनियादी बात से आपको अवगत कराना चाहता हूँ, वह यह है-: जिस दिन यू एन ओ वजूद में आया, उसी दिन तय हो गया कि अब आगे से कोई देश किसी को गुलाम नहीं बना सकता . अगर ऐसा नहीं होता तो दुनिया के किसी न किसी कोने में इलाका दखल की लड़ाई चलते रह। लेकिन ऐसा नहीं कि गुलामी पूरी तरह अतीत का विषय बनी. नहीं बानी, इसलिए कि उपभोग के आधिकाधिक साधनों पर कब्जा करने की मानव जाति की प्रवृत्ति न तो खत्म हुई है, न आगे होगी. उपभोग के अधिकाधिक साधनों पर कब्जा जमाने के लिए तलवारों- बंदूकों का इस्टेमाल होता था. UNO के उदय के बाद उपभोग के साधनों पर कब्जा जमाने के लिए सभ्यतर युग में हथियार बनाया गया फाइनेंस और टेक्नॉलजी को.अगर फाइनेंस और टेक्नॉलजी गुलाम बनाने का हथियार है तो भारत लगभग गुलाम देश के रूप मे तब्दील हो चुका है . फाइनेंस और टेक्नॉलजी के जरिये भारत की तीव्रतर हुई है 24 जुलाई 1991 से और इसके लिए जिम्मेवार है भारत के जन्मजात शासकों अर्थात सवर्णो की स्वार्थपरता . सिर्फ बहुजनों को जीवीकोपार्ज के अवसरों से पूरी तरह वंचित करने के कुत्सित इरादे से ही सवर्ण शासकों ने टेक्नॉलजी और फाइनेंस के विदेशियों पर निर्भरता बढ़ाना शुरू किया. इसी क्रम में सुरक्षा से जुड़े उपकर्मो तक में 100 प्रतिशत एफ डी आई लागू हो चुकी है। इस मामले में व्यक्तिगत रूप से किसी को चिन्हित करना हो तो सबसे आगे नजर आएंगे मोदी । उन्हों ने बहुजनों को बर्बाद करने के जुनून में विदेशी वित्त और टेक्नोलोजी के खतरे की बिल्कुल अनदेखी कर दिया।इससे मोदी राज में चीन का भारत पर किस हद तक प्रभुत्व कायम हो गया, उसका ठीक से आंकलन करने पर किसी के भी पसीने छूट जायेंगे । आज के एक अखबार में छपी रिपोर्ट से पता चलता है कि घरेलू स्तर इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीज दवा के निर्माण के 90 प्रतिशत एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रेडिएंट्स का आयात चीन से होता है। भारत 70 फीसद मोबाइल फोन के लिए चीन पर निर्भर करता है। भारत में स्मार्ट फोन बनाने वाली पाँच शीर्ष कंपनियों में चार चीन की हैं । देश में स्थापित 61371 मेगावाट बिजली प्लांट चीन में बने उपकरण से चल रहे हैं। गेटवे हाउस के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2015 से लेकर अब तक भारत के टेक स्टार्ट- अप्स में चीन ने चार अरब डॉलर(वर्तमान भाव पर 30,000 करोड़ रुपए) से अधिक का निवेश किया है। चीन की अलीबाबा ने भारत की ई- कॉमर्स कंपनी स्नैपडील, डिजिटल वालेट कंपनी पेटीएम और फूड डेलीवरी कंपनी जोमैटो में निवेश किया है । चीन की टेंसेंट ने मैसेजिंग कंपनी हाइक और कैब एग्रीगेटर ओला में निवेश किया है। चीन भारतीय बाज़ार पर मोदी राज में साल दर साल किस तरह हावी होते गया है, इसका अनुमान पिछले पाँच साल के आयात आंकड़े से लगाया जा सकता है। भारत ने चीन से 2015 में 58.26 अरब डॉलर, 2016 में 59.43, 2017 में 68. 10, 2018 में 76. 87 और 2019 में 68 अरब डॉलर का आयात किया। यदि हम चीन को किए जाने वाले निर्यात का आंकड़ा देखेंगे तो भारत पर और करुणा होगी। बहरहाल जब यूएनओ है तो देर-सवेर चीन से सीमा विवाद सुलझ ही जाएगा, लेकिन ड्रैगन फाइनेंस और टेक्नोलोजी के जरिये भारत की आजादी को निगलने का जो प्रयास कर रहा है, उससे बचाने कोई नहीं आएगा। अतः जरूरी है कि हम टेक्नोलोजी और वित्त के मोर्चे पर चीन का मुक़ाबला करने की बेहतर तैयारी करें.

  • एच एल दुसाध, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली

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