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कोरोना काल में साहित्य चर्चा – 2 करोड़ों में क्यों खेलते हैं वेस्टर्न साहित्यकार !

साहित्यकार मित्रों, भारत में आमतौर लोगों कि धारणा है कि लेखकों पर लक्ष्मी की कृपा नहीं होती: वे कंगाली मे गुजर- वसर करने के लिए विवश होते हैं । विक्रम सेठ, अरुंधति रॉय ,चेतन भगत, झुंपा लहिरी, अलका सरागवी इत्यादि द्वारा लेखन के जरिये करोड़ों अर्जित किए जाने के बावजूद लेखकों की कंगालियत के विषय बनी पूर्व धारणा अभी भी अटूट है, विशेषकर हिन्दीपट्टी में । कारण, हिन्दी के किसी लेखक के कविता, कहानी, उपन्यास इत्यादि की 1000 कॉपी भी बिक जाय तो चर्चा का विषय बन जाता है । लेकिन वर्षों की मेहनत के बाद छपी किसी किताब की हजार कॉपी बिक ही जाय तो उससे कितनी रॉयल्टी मिल जाएगी ? इतनी तो नहीं मिलेगी जिससे कोई आराम से उसके सहारे जी सके, इसलिए इस देश में विरले ही कोई लेखन को जीविकोपार्जन माध्यम बनाता है।

लेकिन लेखन का पेशा भले ही भारत के लोगों के लिए अर्थोपार्जन का सुरक्षित जरिया न हो,किन्तु पश्चिमी देशों के साहित्यकारों के लिए यह एक निरापद पेशा है। फिल्म, गायन, खेल-कूद इत्यादि की भांति लेखन भी ऐसा पेशा है, जिसमें बेशुमार धन है।। कारण, ढंग से लिखी गयी किताब की कुछेक लाख प्रतियाँ निकल जाना आम बात है। इसलिए उन देशों में लाखों लोग पूरी तरह लेखन के पेशे पर निर्भर रहकर सम्मानजनक ज़िंदगी जी रहे हैं। सिर्फ सम्मानजनक ही, कुछ कालजीवी तो ऐसी शाही ज़िदगी जीने का अवसर पाते है जिसे देखकर फिल्म, गायन, स्पोर्ट्स इत्यादि क्षेत्र के स्टारों तक को ईर्ष्या होती होगी ।

मैंने जिन लेखकों को कभी रात-रात भर जग कर पढ़ा था , उनमे अगाथा क्रिस्टी के किताबों की 2 बिलियन, हेरोल्ड रॉबिन्स की 800 मिलियन , सिडनी शेल्डन की 600 मिलियन,आर्थर हेली की 250 मिलयन , एलिस्टर मैक्लीन की 175 मिलियन तक की संख्या में बिकी हैं। सिर्फ वे ही आर्थर काँनन डायल, मारग्रेट मिचेल, इयान फ्लेमिंग, ब्राम स्टॉकर, मेरी शेली, अलेक्ज़ेंडर दुमस, जुले वार्न, मारिओ पुजो इत्यादि की किताबें औसतन 150-200 मिलियन की संख्या में पाठकों के बीच पहुंची हैं। नए जमाने मे हैरी पॉटर की लेखिका जे के रोलिंग 1997 मे पॉटर सीरीज की अपनी पहली किताब रिलीज होने के बाद 2004 में फोर्ब्स द्वारा विश्व इतिहास की पहली अरबपति लेखिका होने का गौरव पा गईं। उनकी किताबों की अबतक 500 मिलियन अर्थात 50 करोड़ प्रतियाँ बिक चुकी हैं। पश्चिम मे अबतक लगभग 150 के आसपास ऐसे लेखक हुये हैं,जिनकी 100 से लेकर 800 मिलियन तक किताबें बिक चुकी हैं, जिसकी ज़ोर से उन्हे दो चार नहीं , कई –कई सौ करोड़ों में खेलने का अवसर मिला है। हैं न यह आश्चर्य का विषय !

साहित्यकार मित्रों, अब यहा सवाल पैदा होता है, क्या है वेस्टर्न लेखकों की सफलता का राज! रोलिंग, फ्लेमिंग, ड्यूमों, हेराल्ड रॉबिन्स, ब्राम स्टॉकर की किताबें क्यों करोड़ो-करोड़ों पाठकों तक पहुँचने मे समर्थ हुई? मैं पिछले चार- पाँच दिनों से इसी सवाल से टकराते हुये एक लेख लिख रहा हूँ। मेरे मन मे जो सवाल उठा है उसके निराकरण में आपका जवाब काफी सहायक हो सकता है।
बहरहाल मैंने जो कारण संधान किया है वह है -:

1- वे उस अंग्रेजी भाषा में लेखन करते है ,जिसकी पहुँच प्रायः यह पूरे विश्व में है।

2- लेकिन यह गौड़ कारण है ! असल कारण यह है कि उन्होंने रोमांस, एक्शन, एडवेंचर, मिस्ट्री, हॉरर, थ्रिलर, फंतासी, विज्ञान कथा इत्यादि में किसी एक को प्रधानता दिया तथा इसके लिए खास चरित्र को जन्म देकर अपना रचना संसार विकसित किया। चूंकि उन्हे लेखन के जरिये यश धन- अर्जित करना था और इस क्षेत्र में भारी प्रतिस्पर्द्धा है, इसलिए विविध विषयों पर कलम न चला कर किसी ऐसे विषय पर मास्टरी हासिल करना चाहते है, जिसमें औरों से बेहतर दिखें: एक ब्रांड बनें!

मैंने कुछ दिन पूर्व इस शृंखला के पहले पोस्ट में भी आपके समक्ष वेस्टर्न साहित्य से जुड़ी एक जिज्ञासा रखा था, पर आप इग्नोर कर गए थे। किन्तु इस बार ऐसा न कीजिएगा । अतः साहित्यकार मित्रों, प्लीज अब आप बताएं-:

करोड़ों में क्यों खेलते हैं वेस्टर्न साहित्यकार ?

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