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कोरोना काल में साहित्य चर्चा- 10

करोड़ों में क्यों खेलते हैं वेस्टर्न साहित्यकार

अंडरवर्ल्ड की विस्मयकर दुनिया को सामने लाया : द गॉडफादर

अगर एडगर एलेन पो, मेरी शेली, ब्राम स्टॉकर ने भूतहा लोक रचा तो 1969 में इतालवी मूल के अमेरिकी लेखक मारियो पूजो एक ऐसा अंडर वर्ल्ड लेकर सामने आए जिसके समक्ष शक्तिशाली अमेरिका का शासन तंत्र भी असहाय दिखा। सच कहता हूँ,जब मैं पहली बार गॉडफादर पढ़ा तो मुझे ऐसा लगा कि अमेरिकी शासन तंत्र के समांतर इटली मूल के अपराधियो के ऐसे कई संगठन क्रियाशील हैं, जिनके समक्ष वहाँ का प्रशासन मूक दर्शक बने रहने के लिए विवश है। अगर कई-कई हरकूल पायरों, शर्लक होम्स, जेम्स बॉन्ड एक साथ मिलकर इन्हे नियंत्रित करने का प्रयास करें तो भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। क्राइम थ्रिलर ‘द गॉडफादर’ के विषय में कुछ कहना कलम और स्याही की बर्बादी है। इतना कहा जा सकता है अमेरिकी – इतालवी माफिया की अपराध दुनिया पर लिखने के लिए विख्यात मारियो पुजो ने गॉडफादर के जरिये एक ऐसी दुनिया को सामने लाया, जो उसके पहले कुछ – कुछ सुनी तो गयी थी पर, देखि नहीं गयी थी। यह इतालवी मूल के संगठित मॉडर्न अपराधियों की एक ऐसी दुनिया थी,जिसके समक्ष दुर्दांत डकैतो की दुनिया भी फीकी लगने लगी। पुजो गॉडफादर की अनूठी दुनिया चित्रित करने मे इसलिए सफल हुये,क्योंकि वे अमेरिका के उस मैनहटन में जन्मे और पले-बढ़े जिसकी पहचान ही अपराध के लिए रही। इतालवी मूल का होने के नाते उन्हे इतालवी संस्कृति और परम्पराओं की गहरी जानकारी थी। बाद मे वह द्वितीय विश्व युद्ध मे अमेरिकी सेना के लिए सेवा प्रदान किए । यह सारी बाते ही गॉडफादर के चरित्रों के निर्माण में सहायक हुई। मैं फिल्म रिलीज के पहले’ द गॉडफादर’ एकाधिक बार पढ़ चुका था।इस उपन्यास को पढ़ने के बाद ऐसा लगा फिल्म के पर्दे पर इन चरित्रों के साथ न्याय नहीं हो सकता।बाद मे जब यह फिल्म रिलीज हुई तो यह हालीवुड के सौ साल के इतिहास मे दो-तीन सबसे बेहतरीन फिल्मों में चिन्हित हुई। मारियो पूजों भी तीन भागों मे बनी इस फिल्म की पटकथा लेखन के लिए दो बार ऑस्कर पाये ।इसमे डॉन का चरित्र निभा का मार्लोन ब्रांडों और अल पचीनी तो अमर हो ही गए, फिल्म से जुड़े हर छोटे-बड़े एक्टर के करियर में भी भारी उछाल आ गया। किन्तु मील का पत्थर बनने के बावजूद व्यक्तिगत तौर पर मुझे शिकायत रही कि पर्दे पर इस उपन्यास के चरित्र उतने भव्य रूप मे सामने नहीं आ पाये जैसा पुजो ने उपन्यास में चित्रित किया था। पुजो के द गॉडफादर पर तीन फिल्मे बनी और चौथी फिल्म का पटकथा लेखन के दौरान अचानक 79 वर्ष की उम्र उनका निधन हो गया। जैसा कि लेख के शुरू मे वेस्टर्न राइटरों कि सफलता का राज बताते हुये कहा गया है कि वे मुख्यतः एक खास विषय चुने और उसी पर अपना रचना संसार विकसित किए। मारियो पुजो ने भी इसका अनुसरण करते हुये अपनी रचनाओं का विषय अमेरिका में सक्रिय इतालवी मूल के माफियाओं को बनाया था। गॉडफादर के अतिरिक्त उन्होंने ‘डार्क एरीना, द फर्स्ट डॉन, सिसिलियन जैसे उपन्यास लिखे, जो इतालवी माफियाओं पर केन्द्रित रहे। पुजो के गॉडफादर ने पूरी दुनिया मे चल रहे संगठित अपराध मे तबदीली ला दिया। आज सारी दुनिया में ‘डॉन’ शब्द पॉपुलर है तो उसका श्रेय द गॉडफादर के डॉन वीटो कार्लियान चरित्र को जाता है, जिसे महानतम एक्टर मार्लोन ब्रांडो ने अविस्मरणीय अंदाज़ में अदा किया था ।

  • एच एल दुसाध, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली

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