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कोरोना काल में साहित्य चर्चा- 6

करोड़ों में क्यों खेलते हैं वेस्टर्न साहित्यकार ?

बॉन्ड जैसा कोई नहीं !बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में जिन दिनों शर्लक होम्स और हरकूल पायरो से बेहतर जासूस की कल्पना करना दुष्कर था, 1952 मे जेम्स बॉन्ड जैसे कालजयी चरित्र लेकर सामने आए इयान फ्लेमिंग।1952 मे प्रकाशित ‘कैसीनो रॉयाल’ के जरिये जेम्स बॉन्ड ने लोगों के दिलो दिमाग पर जो असर डाला उससे दुनिया आज भी उबर नहीं पायी है। फ्लेमिंग को कोड नंबर 007 से मशहूर अपने स्पाइ जेम्स बॉन्ड के प्रभाव का इल्म था, लिहाजा उन्होने कैसीनो रॉयाल के बाद 1953 से 1966 के मध्य अपने मानसपुत्र जेम्स बॉन्ड को लेकर 11 उपन्यास और दो लघुकथा संकलन प्रकाशित करवाए। बॉन्ड सीरीज के इन उपन्यासों और कहानियों को आज तक सबसे ज्यादा बिकने वाली काल्पनिक कहानियों मे बहुत ऊंचे चार्ट पर रखा जाता है। दुनिया भर में बॉन्ड सीरीज के किताबों की दस करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। जेम्स बॉन्ड के उपन्यासों मे सेक्स, सस्पेंस, थ्रिल, एड्वंचर का जैसा समिश्रण रहा वैसा अन्य किसी में नहीं मिला। जेम्स बॉन्ड का अद्भुत चरित्र गढ़ने में फ्लेमिंग इसलिए ज्यादा सफल हुये, क्योंकि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान वह खुद ब्रिटेन की नौसेना के खुफिया डिवीजन में रहे और कई योजनायेँ उनकी देखरेख में बनीं। द्वितीय विश्वयुद्ध काल में खुफिया विभाग में नौकरी तथा युद्धोत्तर काल में पत्रकार के रूप मे किए गए फ्लेमिंग के काम का अनुभव जेम्स बॉन्ड चरित्र को प्रभावी तरीके से उभारने में काम आया। बॉन्ड के जन्मदाता फ्लेमिंग लंबी उम्र न जी सके: 1964 में ही दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गयी। किन्तु , उनके नहीं रहने पर दूसरे कई लेखकों ने बॉन्ड को नायक बनाकर स्पाइ थ्रिलर लिखे,जिसे पाठकों ने हाथोहाथ लिया। सिर्फ अगाथा क्रिस्टी, आर्थर काँनन डायल, इयान फ्लेमिंग ही नहीं, एडगर वालेस, इर्विन वालेस, जार्ज सिमेनन , कार्टर ब्राउन, फ़्रेडरिक फोरसाइथ इत्यादि सैकड़ों लेखकों ने कड़ी मेहनत और डेटेक्टिव और मिस्ट्री केन्द्रित फिक्सन लिखे। उन्होंने भले ही हरकुल पायरों , शर्लक होम्स, जेम्स बॉन्ड जैसे चरित्र न रचे हों पर, उनमें ऐसा कुछ रहा कि उनकी किताबें करोड़ो – करोड़ों, की संख्या मे पाठकों तक पहुंची और उन्हें अपार यश और धन मुहैया कराई। क्रमशः …

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