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ऐसे भाषणों से मोदी का कुछ नहीं बिगड़ेगा

आजकल तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा संसद में दिए गए अपने भाषण के कारण काफी चर्चा में हैं. निस्संदेह उनका भाषण बहुत ही अच्छा, जिसे मोदी और उनके सहयोगी दलों के सांसद नजर झुका कर सुनाने के लिए रहे .इसमें भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को योग्य सम्मान न देने के लिए मोदी को ठीक से निशाने पर लिया गया है. लेकिन ऐसे भाषणों से मोदी एंड क.कुछ समय के लिए भले ही नजरें झुका लें, इससे भाजपा की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा .बात तब बनेगी जब मोदी की सवर्णपरस्त आर्थिक नीतियों को बुरी तरह एक्सपोज किया जाय .लेकिन ऐसा करना महुआ मोइत्रा जैसा प्रगतिशील नेता हो या रवीश कुमार जैसा क्रान्तिकारी पत्रकार: तमाम धर्मनिरपेक्ष सवर्णों के लिए कठिन है. इसमें उनकी वर्गीय चेतना एवरेस्ट बनकर खड़ी हो जाती है.सच्ची बात तो यह है कि संघ प्रशिक्षित मोदी की तमाम गतिविधियाँ सवर्णों को और शक्तिसंपन्न करने से प्रेरित हैं.उनकी सवर्णवादी पालिसी से ही देश की टॉप की 1% आबादी का 73% वेल्थ पर कब्ज़ा हो गया है. उनकी सवर्णपरस्त नीतियों के चलते ही केंद्र और भाजपा शासित राज्यों के मंत्रीमडलों में सवर्णों का 80-85% प्रतिनिधित्व हो गया है. मोदी की सवर्णपरस्त नीतियों के कारण ही राष्ट्रपति से लेकर पीएमओ , गृह मंत्रालय से लेकर वित्त मत्रालय : तमाम मंत्रालयों में ही सवर्ण अधिकारियों की संख्या औसतन 90% है.मोदी सरकार सिर्फ और सिर्फ सवर्णों के प्रति ही समर्पित है, इसलिए ब्यूरोक्रेसी के निर्णायक पदों पर प्राइवेट सेक्टर से 60%नियुक्ति होने जा रही है. मोदी की सवर्णवादी पालिसी से ही हजारों साल के विशेशाधिकर्युक्त सुविधासंपन्न वर्ग शक्ति के समस्त स्रोतों(आर्थिक-राजनैतिक, धार्मिक-शैक्षिक) इत्यादि पर 80-90% कब्ज़ा हो गया है.जन्मजात सुविधाभोगी वर्ग के हित में क्रियाशील मोदी सरकार जैसी दूसरी सरकार आज की तारीख में अन्य किसी देश में दुर्लभ है. सिर्फ और सिर्फ सवर्णों के हित में मोदी सरकार ने आर्थिक और सामाजिक विषमता को जिस एक्सट्रीम बिंदु पर पहुंचा दिया है, उससे डॉ. आंबेडकर के शब्दों में लोकतंत्र के ढाँचे के विस्फोटित होने लायक हालात पैदा हो गए हैं. भारी अफ़सोस की बात है कि मोदी-विरोधी कोई भी प्रगतिशील सवर्ण उनकी सवर्णपरस्ती को जनमक्ष लाने का प्रयास नहीं करता और बिना ऐसा किये मोदी सरकार का कुछ भी नहीं बिगड़ सकता चाहे पूरा संसद महुआ मोइत्रा और बौद्धिक जगत रवीश कुमारों से ही क्यों न भर जाये. सच बात तो यह है कि मोदी सरकार ने मूलनिवासी बहुजनों के खिलाफ राज-सत्ता का जो भयावह इस्तेमाल किया है, उसमे महुआ- रवीश जैसे लोग सेफ्टी वाल्व का काम करते हैं.बहुजनों को इनके मोदी विरोधी कामो से नाचने के बजाय निर्लिप्त रहने का अनुशीलन करना चाहिए.

  • एच एल दुसाध, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन डाइवर्सिटी मिशन, दिल्ली

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