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असाधारण लेखिका shelly kiran के एक पोस्ट पर मेरा कमेंट-:

इसकी जड़ें बंगाल की इस मशहूर कहावत में छिपी हैं कि अभाव में स्वभाव बिगड़ता है. सहस्राधिक साल तक ईस्लामिक और ब्रितानी शासन में हिंदू समाज के अभावों में घिरे रहने के कारण भारत के बहुसंख्य लोगों में उच्च मानवीय मूल्य विकसित ही न हो सका और वे नाना प्रकार की कमजोरियों से घिरे रहे.किंतु अंग्रेजों के जाने के बाद जब सवर्ण स्वाधीन भारत की सत्ता पर काबिज हुए धीरे धीरे वे अभावाजन्य कमजोरियों से उबरने लगे. बावजूद इसके भारत का लोकतंत्र आज संकट ग्रस्त है तो इसलिए कि हजारों साल तक विदेशी शासन में अभाव झेलते रहने के कारण आज के इस वर्णवादी शासक वर्ग में जियो और जीने की भावना ठीक से विकसित नहीं हो पायी है. किंतु सवर्णों के विपरित भारत का जन्मजात वंचित समाज इस मामले में उतना भाग्यवान नहीं रहा. शक्ति के समस्त स्रोतों से बहिष्कार इससे उबरने में बाधक बना रहा. आज वंचित बहुजन समाज की सबसे बड़ी ट्रेजडि यह है कि यह समाज सदियों से अभाव और दुख – दारिद्र में पला बढ़ा है इसलिए यश – धन, पद – प्रतिष्ठा से महरूम रहा. सदियों के इस अभाव – वंचना की बड़ी कीमत बहुजन मुक्ति आंदोलन को अदा करनी पड़ी है. इस अभाव के कारण ही पद – प्रतिष्ठा, धन – दौलत की लोभ में ढेरों बहुजन टैलेंट शत्रु – खेमे में सक्रिय रहकर अपने ही भाईयों के खिलाफ.. सदियों के इस अभाव के कारण जिन थोड़े से लोगों ने अवसरों का सद्व्यवहार कर खुद को हीरो का स्टेटस एंजॉय करने की स्थिति में खड़ा किया, आज वे समाज के बृहत्तर हित में अपने स्टेटस को खोने का रत्ती भर भी जोखिम नहीं उठाते : सब समय अपने नायकत्व को तरज़ीह देने के लिए.. यही कारण है बहुजन हीरोज सामान्यतया किसी बड़े लक्ष्य के प्रति संगठित नहीं हो पाते. उन्हें डर रहता है कि इस क्रम मे वे अपना हीरो का स्टेट्स खो देंगे. ये बहुजन हीरो अपने स्टेटस को लेकर इतने चैतन्य रहते हैं कि फेसबुक पर अपने समाज के किसी के पोस्ट को शेयर करना तो दूर, like करने से भी कतराते हैं. ..

  • एच. एल दुसाध – राष्ट्रीय अध्यक्ष ,बहुजन डाइवर्सिटी मिशन

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