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    डाइवर्सिटि से ही भारत के आदिवासी बन सकते हैं: समृद्ध और आधुनिक!

    आज विश्व आदिवासी दिवस है. इस अवसर का इस्तेमाल आदिवासियों को अधिकार चेतना से समृद्ध और आधुनिक जीवन शैली की ओर उन्मुख करने में होना चाहिए.जहाँ तक भारत का सवाल है, इस दिशा में नहीं के बराबर काम हुआ. इसलिए आदिवासियों की समस्या लगभग पूर्ववत है.ऐसा होने का एक बड़ा कारण यह भी है कि भारत में मूलनिवासी आदिवासियों की बात करनेवालों में रिगो बेर्ता मेंचू जैसा जिगरवाला कोई व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ. गवाटेमाला के एक ट्राइब कबीले में जन्मीं रिगो बेर्ता ने 1992 में अमेरिका के उस ऐतिहासिक जश्न के रंग में भंग डाल पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था जो कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज किये…

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    हिंदू मानव सभ्यता की दौड़ में कई सौ साल पीछे

    हिंदू मानव सभ्यता की दौड़ में कई सौ साल पीछे होने के कारण आज भी बर्बरता से उबर नहीं पाए हैं, यह बात दावे के लिखता रहा हूँ.मेरा दावा एकदम सही है, इसका प्रमाण आगरा की कल की एक घटना है, जहाँ हिंदुओं ने एक दलित महिला की लाश को चिता से उतारने के लिए बाध्य कर दिया. उस शर्मनाक घटना की रिपोर्ट अभी ndtv पर रवीश के प्रोग्राम में देख रहा हूँ.बहरहाल यह कोई अपवाद घटना नहीं है. हिंदू रोजाना इससे मिलती जुलती हजारों घटनाएं अंजाम देते रहते, एससी /एसटी एट्रोसिटि जैसे कठोर एक्ट के बावजूद. ऐसे जंगली समाज को क्या सुधारा जा सकता है? नहीं! क्योंकि इसे सुधारने…

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    बहुजनों में पैदा करनी होगी : सर्व-व्यापी आरक्षण की उत्कट चाह !

    आरक्षण का देश : भारत भारतवर्ष आरक्षण का देश है.कारण,धर्माधारित जिस वर्ण-व्यवस्था के द्वारा यह देश सदियों से परिचालित होता रहा है,वह वर्ण-व्यवस्था मुख्यतः शक्ति के स्रोतों-आर्थिक ,राजनीतिक,शैक्षिक और धार्मिक- के बंटवारे की व्यवस्था रही है.चूंकि वर्ण-व्यवस्था के प्रवर्तक विदेशागत आर्य थे, इसलिए उन्होंने इसमें ऐसा प्रावधान रचा कि शक्ति के स्रोतों में मूलनिवासी समाज (शुद्रातिशूद्रों) को रत्ती भर भी हिस्सेदारी नहीं मिली और यह समाज चिरकाल के लिए पूर्णरूपेण शक्तिहीन होने को अभिशप्त हुआ.ऐसे शक्तिहीन समाज को सदियों बाद किसी व्यक्ति ने पहली बार शक्ति के स्रोतों में हिस्सेदारी दिलाने का सफल दृष्टान्त कायम किया तो वह थे 26 जून,1874 को कोल्हापुर राजमहल में जन्मे कोल्हापुर नरेश छत्रपति शाहू…

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    काबिले तारीफ है : सवर्णो की अधिकार चेतना!

    सवर्णो की अधिकार चेतना हमेशा से ही काबिले तारीफ रही है, जिसका मुजाहिरा उन्होनें फिर एक बार झारखंड में किया है. झारखंड में गत 14 जुलाई को हेमंत सोरेन सरकार ने 25 करोड़ के ठेकों में st , sc, obc को प्राथमिकता देने के घोषणा किया, जिसके खिलाफ वहां के सवर्ण मुखर हो गए हैं. उनका कहना है कि सरकार द्वारा ठेकों को जाति आधारित करने से लाखों लोगों की रोजी रोटी प्रभावित होगी. इसलिए सरकार को यह फैसला वापस लेना होगा नहीं तो हम राज्य व्यापी आंदोलन छेड़ेंगे और कोर्ट में जायेंगे. सवर्णो द्वारा सोरेन सरकार के नए फैसले के खिलाफ राज्य व्यापी आंदोलन छेड़ने और कोर्ट में जाने…

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    असाधारण लेखिका shelly kiran के एक पोस्ट पर मेरा कमेंट-:

    इसकी जड़ें बंगाल की इस मशहूर कहावत में छिपी हैं कि अभाव में स्वभाव बिगड़ता है. सहस्राधिक साल तक ईस्लामिक और ब्रितानी शासन में हिंदू समाज के अभावों में घिरे रहने के कारण भारत के बहुसंख्य लोगों में उच्च मानवीय मूल्य विकसित ही न हो सका और वे नाना प्रकार की कमजोरियों से घिरे रहे.किंतु अंग्रेजों के जाने के बाद जब सवर्ण स्वाधीन भारत की सत्ता पर काबिज हुए धीरे धीरे वे अभावाजन्य कमजोरियों से उबरने लगे. बावजूद इसके भारत का लोकतंत्र आज संकट ग्रस्त है तो इसलिए कि हजारों साल तक विदेशी शासन में अभाव झेलते रहने के कारण आज के इस वर्णवादी शासक वर्ग में जियो और जीने…

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    ठेकों में वंचित जातियों को प्राथमिकता दिये जाने की घोषणा करने वाले सीएम हेमंत सोरेन की हौसला अफजाई करने वाले भवनाथपुर के बहुजन ठेकेदारों को भूरि 2 बधाई.इनका अनुसरण देश के बाकी हिस्सों के बहुजनों को भी करना चाहिए

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    ऐसे भाषणों से मोदी का कुछ नहीं बिगड़ेगा

    आजकल तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा संसद में दिए गए अपने भाषण के कारण काफी चर्चा में हैं. निस्संदेह उनका भाषण बहुत ही अच्छा, जिसे मोदी और उनके सहयोगी दलों के सांसद नजर झुका कर सुनाने के लिए रहे .इसमें भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को योग्य सम्मान न देने के लिए मोदी को ठीक से निशाने पर लिया गया है. लेकिन ऐसे भाषणों से मोदी एंड क.कुछ समय के लिए भले ही नजरें झुका लें, इससे भाजपा की राजनीति पर कोई असर नहीं पड़ेगा .बात तब बनेगी जब मोदी की सवर्णपरस्त आर्थिक नीतियों को बुरी तरह एक्सपोज किया जाय .लेकिन ऐसा करना महुआ मोइत्रा जैसा प्रगतिशील नेता…

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    मोदी: चैंपियन मिथ्यावादी !

    आज के 28 जून के दैनिक जागरण में सबका साथ- सबका विकास से जुड़ी मोदी की एक विस्तृत रिपोर्ट छपी है जिसमें केरल के पथनमथिट्टा मे जोसेफ मारथोमा मेट्रोपॉलिटन के 90 वें जयंती पर उनके लंबे स्पीच का सार बताते हुये लिखा गया है-: प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार धर्म , लिंग, जाति, नस्ल या भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करती है। हम 130 करोड़ भारतीयों को सशक्त बनाने की इच्छा से निर्देशित होते हैं और हमारा मार्गदर्शन भारत का संविधान करता है।‘मित्रों, प्रधानमंत्री का उपरोक्त बयान झूठ की पराकाष्ठा है, ऐसा विगत छः सालों से उनके सरकार के चाल- चलन पर पैनी नजर रखने वाला एक साधारण…