BAHUJAN DIVERSITY MISSION

Founder President: H.L. DUSADH

About Me.

एच एल दुसाध के बारे में

दुसाध कौन !
20 अक्तूबर , 1953 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के नरौली खेम में जन्मे और कला व संस्कृति की पोषिका बंग-भूमि में पले-बढ़े तथा पूरे भारत मे ‘डाइवर्सिटी मैन ऑफ इंडिया’ के रूप मे विख्यात एच.एल. दुसाध बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के संस्थापक अध्यक्ष हैं। आप एक ऐसे विरल लेखक हैं, जिन्हें उनके पाठक पद्म से लेकर नोबेल पुरस्कार दिये जाने की मांग समय-समय पर उठाते रहते हैं।

आपका मानना है कि मानव-जाति की सबसे बड़ी समस्या आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी है तथा इसका खात्मा शक्ति के स्रोतों(आर्थिक-राजनीतिक-शैक्षिक-धार्मिक) में सामाजिक (Social) और लैंगिक(Gender) विविधता(Diversity) के सम्यक प्रतिबिम्बन से ही हो सकता है, इसलिए आपकी प्रायः सभी किताबों/लेखों का केंद्रीय तत्व ‘डाइवर्सिटी’ होता है।
आर्थिक और सामाजिक विषमता के खात्मे के लिए आपने महज़ दो दशकों मे 80 से अधिक किताबें दी हैं, जिनमें 75 किताबें ही डाइवर्सिटी पर केन्द्रित हैं॰ मुख्यतः पत्रकारीय विधा मे लिखने वाले दुसाध के सूक्ष्मतम तथा उच्चतम स्तरों के ज्ञान को पढ़कर पाठक सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आप पत्रकार हैं या किसी विश्वविद्यालय का प्रोफेसर !

Our Mission

हमारा मिशन
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चूंकि हमारा दृढ मत है कि आर्थिक और सामाजिक गैर-बराबरी ही मानव-जाति की सबसे बड़ी समस्या है तथा शक्ति के स्रोतों(आर्थिक-राजनीतिक- शैक्षिक धार्मिक)में सामाजिक (social) और लैंगिक(gender) विविधता (diversity) के असमान प्रतिबिम्बन (reflection) से ही सारी दुनिया सहित भारत में भी इसकी उत्पत्ति होती रही है, इसलिए बहुजन डाइवर्सिटी मिशन (बीडीएम) ने आर्थिक और सामाजिक विषमता के खात्मे के लिए शक्ति के सभी स्रोतों में सामाजिक और लैंगिक विविधता का प्रतिबिम्बन कराने की कार्य योजना बनाया है।
ऐसे में बीडीएम की ओर से निम्न क्षेत्रों में सामाजिक और लैंगिक विविधता का प्रतिबिम्बन कराने अर्थात विविधतामय भारत के चार सामाजिक समूहों-
सवर्ण,ओबीसी,एससी/एसटी और धार्मिक अल्पसंख्यकों- के स्त्री-पुरुषों की संख्यानुपात में अवसरों के बंटवारे की निम्न दस सूत्रीय कर्मसूचियां स्थिर की गयी हैं -:

1- सेना व न्यायालयों सहित सरकारी और निजीक्षेत्र के सभी स्तर की,सभी प्रकार की नौकरियों व धार्मिक प्रतिष्ठानों;
2- सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा दी जानेवाली सभी वस्तुओं की डीलरशिप;
3- सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा की जानेवाली सभी वस्तुओं की खरीदारी;Continue Reading


4-सड़क-भवन निर्माण इत्यादि के ठेकों,पार्किंग,परिवहन;
5- सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा चलाये जानेवाले छोटे-बड़े स्कूलों, विश्वविद्यालयों, तकनीकि-व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं के संचालन,प्रवेश व अध्यापन;
6- सरकारी और निजी क्षेत्रों द्वारा अपनी नीतियों,उत्पादित वस्तुओं इत्यादि के विज्ञापन के मद में खर्च की जानेवाली धनराशि;
7- देश –विदेश की संस्थाओं द्वारा गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) को दी जानेवाली धनराशि;
8- प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया एवं फिल्म-टीवी के सभी प्रभागों;
9- रेल-राष्ट्रीय मार्गों की खाली पड़ी भूमि सहित तमाम सरकारी और मठों की खाली पड़ी जमीन व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए अस्पृश्य-आदिवासियों में वितरित हो एवं.
10- ग्राम-पंचायत, शहरी निकाय, संसद-विधासभा की सीटों; राज्य एवं केन्द्र की कैबिनेट; विभिन्न मंत्रालयों के कार्यालयों;विधान परिषद|